मात्रा और वर्ण के आधार पर छन्द दो प्रकार के होते हैं - मात्रिक छंद और वर्णिक छन्द
- मात्रिक छंद - मात्राओं की संख्या को ध्यान में रखकर रचे गये छंद मात्रिक छन्द कहलाते हैं।
- वर्णिक छंद - वर्णों की संख्या को ध्यान में रखकर रचे गये छंद वर्णिक छन्द कहलाते हैं।
उपरोक्त दोनों ही प्रकार के छंद तीन प्रकार के होते हैं - सम, अर्द्ध सम और विषम
- सम - जिन छन्दों के चारों चरणों की मात्राएँ या वर्ण एक से होते हैं वे सम कहलाते हैं जैसे चौपाई, इन्द्रबज्रा आदि।
- अर्द्ध सम - जिन छन्दों में पहले और तीसरे तथा दूसरे और चौथे चरणों में मात्राएँ या वर्ण समान होते हैं वे अर्द्ध सम कहलाते हैं जैसे दोहा, सोरठा आदि।
- विषम - जिन छन्दों में चार से अधिक चरण हों और वे एक समान न हों वे विषम छन्द कहलाते हैं जैसे कुण्डलिया, छप्पय आदि।
आप का ये गुण तो आज पता चला कि आप हिंदी साहित्य के विद्वान भी हैं. आपके ब्लॉग से बहुत कुछ ले कर जा रही हूँ अपने विद्यार्थियों के लिए. लिखना बंद मत कीजियेगा.
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